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प्रदीप मेहरा के बाद चौखुटिया का शंकर बिष्ट चर्चा में, चौखुटिया से दिल्ली के लिए चल रहा है पैदल। मकसद जानेंगे तो आप भी करेंगे तारीफ…..

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आर्मी की तैयारी के लिए नोएडा की सड़कों पर दौड़ता चौखुटिया का प्रदीप मेहरा खूब सुर्खियों में रहा और लोगों ने उसके इस प्रयास की बहुत सराहना भी की की लोग प्रदीप की मदद के लिए भी सामने आए। अब इन दिनों चौखुटिया का एक और युवक चर्चा में है, यह युवक अपने लिए नहीं बल्कि पहाड़ के जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए सड़कों पर निकला है। अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया तहसील अंतर्गत ग्राम चनौला निवासी शंकर सिंह बिष्ट अपने गांव से पैदल राष्ट्रपति भवन दिल्ली के लिए निकले हैं, मकसद है जंल, जंगल, जमीन बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना। जिस उम्र में देश का युवा अपने कैरियर व भविष्य बनाने के बारे में सोचता है उस उम्र में शंकर सिंह बिष्ट जल, जंगल, जमीन बचाने की मुहिम को लेकर अपने गांव से राष्ट्रपति भवन दिल्ली तक पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं। उन्होंने 1 अप्रैल 2022 को अपनी पैदल यात्रा शुरू की है और लगभग 300 किलोमीटर का सफर तय कर वह 9 अप्रैल को देहरादून पहुंचे। देहरादून पहुंचने पर जगह जगह उनका स्वागत भी किया गया।

सजग इंडिया से बातचीत करते हुए शंकर सिंह ने बताया कि बचपन से ही वह प्रकृति के बीच रहें हैं, और प्रकृति प्रेमी हैं। लेकिन उत्तराखंड में प्रत्येक वर्ष ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही हमारी अमूल्य धरोहर वन संपदा वनाग्नि के कारण नष्ट होते जा रहे हैं। आज वनाग्नि के कारण उत्तराखंड में वन संपदा पट भारी संकट मंडरा रहा है, जंगलो में पाई जाने वाली स्थानीय प्रजातियां जैसे बाज(हरा सोना), बुरॉश(राज्य वृक्ष), तिमूल, फलयाट्ट, देवदार आदि जैसे जल सरंक्षक करने में सक्षम, कार्बन अवशोषित करने वाले अन्य औषधि पौधे तथा चौड़ी पत्ती वाले जंगल विलुप्ति के कगार पर खड़े हैं। और हमारे प्राकृतिक जल स्त्रोत सूखते जा रहे हैं, इन्हें बचाने के लिए लोगों में जन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उन्होंने यह रास्ता अपनाया है।

शंकर सिंह ने बताया कि उन्होंने जयपुर से उच्च शिक्षा ग्रहण की है और वह भी चाहते थे कि पढ़ लिख कर वह आगे अपना कैरियर बनाएं और अपना परिवार बसाएं, लेकिन अपनी स्टडी के दौरान उन्होंने पाया कि आने-वाले 30-40 सालों में हमारा भविष्य और हमारी आने वाली पीढ़ी असुरक्षित है, तभी से उन्होंने मन बनाया कि आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए हमें कुछ करना होगा। जिसके बाद उन्होंने तय किया कि लोगों में जागरूकता लाकर लोगों का ध्यान इस ओर खींचा जाए।

अपने अभियान को लेकर शंकर सिंह ने कहा कि हम अपनी इस मुहिम में जरूर सफल रहेंगे और उत्तराखंड के जंगल हिमालय भारत की प्रकृति और संस्कृत बचेगी और हम लोग दोबारा से पर्यावरण बचाने में सक्षम रहेंगे।

शंकर सिंह आज 10 अप्रैल को देहरादून से अपने अगले पड़ाव की ओर निकल पडे हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात का भी समय मांगा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह है करते हुए कहा है कि देवभूमि के जंगलों की इस चिंतनीय विनाश का कारण चीड़ है, क्योंकि आज चीड हमारे उत्तराखंड के लगभग प्रत्येक स्थान पर चौड़ी पत्ती वाले जंगलों के मध्य भी अपना घुसपैठ कर लिया है जो कि वहां अन्य प्रजातियों को नष्ट कर रहा है प्रत्येक वर्ष के जंगलों में लगने वाली आग गुणात्मक रूप से बढ़ रही है अतः महोदय से मेरा आग्रह रहेगा कि कि हमारे जंगलों में चीड के बढ़ते घुसपैठ को रोका जाए और उसकी पत्तियों को आर्थिकी के लिए प्रयोग किया जाए कुछ ऐसे प्रोजेक्ट लगाये जाए जो उस क्षेत्र के पिरूल को इकोनामिक तौर पर सदुपयोग करें और उत्तराखंड के जंगलों को सुरक्षित करें एवं इस क्षेत्र में दोबारा मिक्स फोरेस्टर के मॉडल पर कम किया जाय।