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लोक सेवा चुनाव से पहले किसानों के खाते में आएगी सम्मान निधि की पहली किश्त, मिलेंगे 6000 रुपये सालाना

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लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पहली किश्त किसानों के खातों में आ जाएगी। सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले यह योजना धरातल पर आ जाए। इसलिए उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि के आधार पर किसानों को चिह्नित करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिले स्तर पर राजस्व व कृषि विभाग के माध्यम से किसानों का डाटा तैयार किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को 31 दिसंबर 2018 से लागू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत दो हेक्टेयर तक कृषि जोत वाले छोटे किसानों को प्रति वर्ष छह हजार रुपये प्रत्यक्ष रूप से मिलेंगे।

हर चार माह में दो हजार रुपये सीधे किसानों के खातों में आएंगे। मार्च 2019 तक किसानों को योजना की पहली किश्त के रूप में दो हजार रुपये मिल जाएंगे। किसानों को योजना का लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने काम शुरू कर दिया है।

हालांकि राजस्व विभाग के पास किसानों का रिकॉर्ड उपलब्ध है, लेकिन योजना के लिए राजस्व व कृषि विभाग नए सिरे से किसानों का ब्योरा तैयार करेंगे। जल्द ही राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक भी होने जा रही है।

92 प्रतिशत किसान होंगे लाभान्वित
सम्मान निधि योजना के लिए खसरा खतौनी के आधार पर किसानों का ब्योरा तैयार किया जाएगा। जिनके पास दो हेक्टेयर तक कृषि जोत है, उन्हीं किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। मुख्य राजस्व आयुक्त कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2010-11 में प्रदेश में 6.72 लाख किसान ऐसे थे, जिनके पास कृषि जोत एक हेक्टेयर से कम है। वहीं, 1.57 लाख से अधिक किसानों के पास एक से दो हेक्टेयर तक ही कृषि भूमि है। प्रदेश सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से राज्य के 92 प्रतिशत यानी करीब नौ लाख किसान लाभान्वित होंगे।

प्रदेश के 6.98 लाख हेक्टेयर पर खेती
राज्य में 6.98 लाख हेक्टेयर भूमि पर 10 लाख से अधिक किसान खेतीबाड़ी करते हैं। राज्य गठन के बाद 17 सालों में 0.72 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में कमी आई है। 3.18 लाख हेक्टेयर भूमि बंजर और 1.43 लाख हेक्टेयर परती भूमि है। राज्य का अधिकांश क्षेत्रफल वन भूमि के अंतर्गत है। जिस कारण पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों पर छोटी-छोटी कृषि जोत है।

खसरा खतौनी के आधार पर जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर तक कृषि जोत है, उनका ब्योरा तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इस ब्योरे में किसानों का आधार नंबर व बैंक खातों का डिटेल भी ली जाएगी। जल्द ही शासन स्तर पर बैठक कर योजना की रूपरेखा बनाई जाएगी।
– डी. सेंथिल पांडियन, सचिव, कृषि एवं उद्यान