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छात्रवृत्ति घोटाला: जांच के घेरे में जनजाती निदेशालय के डिप्टी डॉयरेक्टर…

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देहरादून: छात्रवृत्ति घोटाला में जनजाति निदेशालय के डिप्टी डॉयरेक्टर अनुराग शंखधर के खिलाफ अंदरखाने विजिलेंस जांच की भी तैयारी चल रही है। शासन ने भ्रष्टाचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की अनुमति भी दे दी है। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित के खिलाफ विजिलेंस जांच भी कराई जा सकती है।

शासन की अनुमति मिलने के बाद एसआइटी डिप्टी डॉयरेक्टर अनुराग शंखधर के खिलाफ करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करेगी। इसके लिए शासन का अनुमति पत्र मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

एसआइटी प्रभारी मंजूनाथ टीसी का कहना है कि पत्र मिलते ही आरोपित के खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमे में भ्रष्टाचार की धारा बढ़ा दी जाएगी। इधर, सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार को मुकदमा दर्ज होते ही शंखधर विजिलेंस जांच से भी घिर जाएंगे। खासकर 2010 से 2012 तक दून और 2015 से मार्च 2019 तक हरिद्वार में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए सबसे ज्यादा छात्रवृत्ति बांटी गई।

इसके अलावा दून, हरिद्वार, बदायूं समेत अन्य स्थानों पर उनकी प्रॉपर्टी को भी जांच में शामिल किया जा सकता है। उनके कार्यकाल में बांटी गई सबसे ज्यादा छात्रवृत्ति को भी इसी नजर से देखा जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार में मुकदमा दर्ज होने के बाद विजिलेंस जांच पर निर्णय लिया जाएगा। उधर, एसएसपी विजिलेंस सेंथिल अबूदई एस कृष्णराज का कहना है कि फिलहाल विजिलेंस जांच का पत्र नहीं मिला है। शासन का आदेश मिलने के बाद ही जांच कराई जाएगी।

शंखधर के निलंबन पर अधिकारी टाल रहे जिम्मेदारी

छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप से घिरे जनजाति निदेशालय के उप निदेशक अनुराग शंखधर के निलंबन पर अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। निदेशालय ने जहां गुरुवार को निलबंन की लिखित संस्तुति शासन को भेजने की बात कही, वहीं समाज कल्याण के अपर सचिव रामविलास यादव का कहना है कि निलंबन का अधिकार निदेशालय के पास है। आदेश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले को दबाने में समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी कम नहीं है। घोटाले में डिप्टी डॉयरेक्टर अनुराग शंखधर का नाम आया तो निदेशालय ने उन्हें लोकसभा चुनाव आचार संहिता के बावजूद 40 दिन की छुट्टी दे दी। 20 अप्रैल को छुट्टी पूरी होने के बाद भी वह दफ्तर नहीं आए।

इस पर जनजाति कल्याण निदेशालय ने उनके घर के पते पर अलग-अलग तारीख को तीन पत्र भेजे। जवाब नहीं मिला तो पांच मई को समाचार पत्रों में विज्ञापन भी प्रकाशित कराया गया। मगर, शंखधर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। जनजाति कल्याण निदेशालय के निदेशक बीआर टम्टा ने बताया कि गुरुवार को निलंबन की कार्रवाई की संस्तुति के साथ पत्र शासन को भेज दिया है। अब कार्रवाई पर शासन ही निर्णय करेगा।

इधर, शासन में समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव रामविलास यादव ने कहा कि शंखधर के खिलाफ निदेशालय का पत्र अभी नहीं मिला है। इससे साफ है कि कुछ अफसर आरोपी को बचाने के प्रयास में भी अंदरखाने जुटे हैं।

निजी कॉलेजों की छात्रवृत्ति में कटौती

निजी शिक्षण संस्थानों में दशमोत्तर छात्रवृत्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद शासन ने छात्रवृत्ति की राशि में कटौती कर दी है। नए नियम के तहत अब निजी संस्थानों में राजकीय संस्थानों के आधार पर ही छात्रवृत्ति की राशि निर्धारित होगी। वर्तमान में मिल रही वर्ष 2017-18 की छात्रवृत्ति भी इसी संशोधित नियम के आधार पर वितरित की जा रही है।

समाज कल्याण की ओर से दी जाने वाली दशमोत्तर छात्रवृत्ति का निजी संस्थानों में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। पाया गया कि संस्थानों में फर्जी दाखिले दिखाकर छात्रवृत्ति की रकम ठिकाने लगाई गई। इसे देखते हुए शासन ने निजी संस्थानों में विभिन्न कोर्सो में दी जाने वाली छात्रवृत्ति की राशि में कटौती करने का निर्णय लिया है।

शासन की ओर से यह आदेश वर्ष 2017 में जारी हो गया था, जिसे वर्ष 2017-18 की छात्रवृत्ति में लागू किया जा चुका है। यह है नियम पहले समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रतिं वर्ष दशमोत्तर छात्रवृत्ति की राशि निजी कॉलेजों की फीस के आधार पर दी जाती थी।

नए नियम के अनुसार शासकीय संस्थानों की न्यूनतम फीस के आधार पर निजी संस्थानों की छात्रवृत्ति की राशि निर्धारित की गई है। विभाग का प्रयास है कि प्रतिभावान छात्र सरकारी संस्थानों की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करें और निजी कॉलेजों में अनावश्यक खर्च को रोका जा सके।

कटौती कर दी गई लागू 

जिला समाज कल्याण अधिकारी जीत सिंह रावत के मुताबिक, शासन ने निजी शिक्षण संस्थानों की छात्रवृत्ति की राशि में कटौती की है। इस संबंध में वर्ष 2017 में शासनादेश जारी किया गया था, जो वर्तमान में दी जा रही 2017-18 की छात्रवृत्ति पर लागू कर दिया गया है।

छात्रवृत्ति कटौती के विरोध में छात्रों का हंगामा

समाज कल्याण विभाग की दशमोत्तर छात्रवृत्ति की राशि में कटौती के फैसले का छात्र विरोध कर रहे हैं। विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने समाज कल्याण कार्यालय पर जमकर हंगामा किया। छात्रों ने इसे निजी संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों का आर्थिक शोषण बताया। इस दौरान छात्रों की जिला समाज कल्याण अधिकारी से भी तीखी बहस हुई।

नव क्रांति स्वराज मोर्चा के बैनर तले कई छात्र सर्वे चौक स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय पहुंचे और यहां विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्होंने जमकर हंगामा काटा। इसके बाद छात्र जिला समाज कल्याण अधिकारी जीत सिंह रावत के कक्ष में ज्ञापन देने पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। समाज कल्याण अधिकारी ने छात्रों के व्यवहार को लेकर आपत्ति जताते हुए सुरक्षा के लिहाज से कर्मचारियों को हंगामे की वीडियो बनाने को कहा।

उन्होंने पुलिस को भी सूचित करने को कहा, लेकिन अधिकारी द्वारा सख्त रूख अपनाने के बाद छात्रों के तेवर थोड़े नरम पड़ गए। छात्रों ने कहा कि विभाग ने निजी कॉलेजों में मिलने वाली छात्रवृत्ति में बड़ी कटौती की है, जिससे अब उन्हें शेष राशि अपनी जेब से भरनी होगी।

समस्या यह है कि जो छात्र बेहद कमजोर वर्ग से हैं, उनकी पढ़ाई पर संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शन में गजेंद्र जोशी, ऋषभ राठौर, राहुल तोमर, कपिल, जयवीर समेत कई अन्य शामिल रहे।