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अब नौकरी छोड़ने पर भी होगी सरकार की नजर, बन रहा है नया ट्रैकिंग सिस्टम

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सरकारी नौकरियों को ट्रैक करने के लिए सरकार हर तरह का प्रयास कर रही है। इसी के मद्देनज़र सरकार एक नया सिस्टम तैयार करने का प्लान कर रही है। इस सिस्टम से रोजगार की पूरी पिक्चर मिल सकेगी और यह पता चल सकेगा कि जॉब के कितने मौके बने। इस पर नजर अभी भी बनी रहती है लेकिन कोई ठीक सिस्टम नहीं है। अब इस दिशा में काम किया जाएगा।

एंप्लॉयीज प्रविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) की ओर से जारी होने वाले मंथली डेटा में जॉब के नए मौकों के साथ उन लोगों की भी गिनती रहती है, जिन्होंने एक छोड़कर दूसरी जॉब पकड़ी हो या कुछ समय के बाद दोबारा नौकरी शुरू कर रहे हों। हालांकि जॉब छोड़ने वालों और दोबारा जॉइन करने वालों की जानकारी देर से मिलती है, लिहाजा इसे विश्वसनीय नहीं माना जाता है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘दोबारा नौकरी शुरू करने वालों की गिनती करने की व्यवस्था अभी दमदार नहीं है। इसकी अच्छी व्यवस्था बनाने पर ज्यादा सटीक आंकड़े मिलने चाहिए। इसके चलते जल्द ही नेट एंप्लॉयमेंट के आंकड़े भी दिए जाएंगे।’

मंथली पेरोल डेटा अप्रैल 2018 से जारी किए जा रहे हैं। इसमें सितंबर 2017 से हासिल जानकारी दी जा रही है। हालांकि इसमें कुछ कमियां हैं, जिनके कारण इकॉनमी में बनने वाले जॉब के नए मौकों की सही तस्वीर इससे पता नहीं चलती। इसकी वजह यह है कि 20 या इससे ज्यादा कर्मचारियों वाले संगठन ही प्रॉविडेंट फंड के दायरे में आते हैं। इस तरह कई माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज इस दायरे से बाहर हो जाते हैं। साथ ही, ईपीएफओ उन लोगों के लिए मैंडेटरी नहीं है, जिनकी सैलरी 15000 रुपये महीने से ज्यादा हो।

सब्सक्राइबर्स की संख्या में बढ़ोतरी दिखने की एक वजह यह भी हो सकती है कि नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के बाद इकनॉमी में संगठित क्षेत्र का आकार बढ़ रहा है और सब्सक्राइबर्स की संख्या हो सकता है कि नए रोजगार के कारण न बढ़ी हो, बल्कि असंगठित क्षेत्र से फॉर्मल एंप्लॉयमेंट के रूप में रीक्लासिफिकेशन के कारण ऐसा हुआ हो।

ताजा आंकड़ों में दिखाया गया है कि ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स की संख्या जनवरी में 8,96,000 से ज्यादा हो गई, जो इसका 17 महीनों का उच्च स्तर है।

देश में रोजगार के आंकड़ों से जुड़ी विवादित रिपोर्ट को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है. उसके लीक हुए ड्राफ्ट के मुताबिक, 2017-18 में देश में बेरोजगारी 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर थी। आलोचना की जद में आई सरकार ने देश में बने रोजगार के मौकों का पता लगाने के लिए बेस बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है।

हालांकि अधिकारी ने कहा कि सरकार में कुछ लोगों ने दावा किया है कि रोजगार का आकलन करने के लिए मुद्रा लोन का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘ईपीएफओे और मुद्रा में उन लोगों पर नजर होती है, जो मौजूद हैं, न कि उन पर जो नहीं हैं।’