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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: बीकेटीसी के वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष आमने-सामने, आरोपों के बीच सार्वजनिक बहस की चुनौती

गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी को उनके आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए मंगलवार 14 जुलाई दोपहर 12:30 बजे प्रेस क्लब में खुली चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।

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देहरादून- श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में बदरीनाथ धाम के चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है। बीकेटीसी के वर्तमान अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और पूर्व अध्यक्ष तथा वर्तमान उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी को सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति पर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर आरोप लगाने वाले गणेश गोदियाल स्वयं वर्ष 2012 से 2017 (करीब 5 वर्ष 4 माह) तक समिति के अध्यक्ष रहे, जिनके कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक विसंगतियों तथा श्री बदरीनाथ-श्री केदारनाथ मंदिर अधिनियम, 1939 के प्रावधानों के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए थे। उन्होंने दावा किया कि गढ़वाल आयुक्त की जांच में भी इन मामलों का उल्लेख हुआ था।

द्विवेदी ने वर्तमान चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर भी तत्कालीन अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रमोद नौटियाल की प्रारंभिक अस्थायी नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी, जबकि वर्ष 2014 में उन्हें इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर स्थायी नियुक्ति दी गई और वर्ष 2017 में निर्धारित शैक्षणिक एवं तकनीकी अर्हता के बिना उन्हें वैयक्तिक सहायक के पद पर समायोजित कर ₹4600 ग्रेड पे का लाभ दिया गया।

हेमंत द्विवेदी ने आरोप लगाया कि गोदियाल के कार्यकाल में बड़ी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत की गईं। कई नियुक्तियां बिना रिक्त पद, बिना विज्ञापन और बिना चयन प्रक्रिया के की गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिनसर मंदिर निर्माण के लिए लगभग ₹4.06 करोड़ तथा पोखरी स्थित नागनाथ शिव मंदिर के विकास कार्यों के लिए लगभग ₹39 लाख की स्वीकृति दी गई, जबकि दोनों मंदिर बीकेटीसी के अधीन नहीं थे। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया।

इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि टिहरी जिले में मदन नेगी से गणेश प्रयाग तक सड़क निर्माण और श्री गणेश मंदिर में यात्री विश्राम गृह के स्थान पर सड़क निर्माण में मंदिर समिति की धनराशि का उपयोग किया गया। वर्ष 2014 में आपदा राहत कोष से ₹12 लाख एक निजी फर्म को डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण के लिए दिए जाने को भी उन्होंने नियमों के विपरीत बताया।

द्विवेदी ने कहा कि जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि के बाद धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग ने न्याय विभाग से परामर्श लिया था और न्याय विभाग ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक तथा आपराधिक कार्रवाई की संस्तुति की थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में प्राप्त शिकायतों के आधार पर शासन ने पुनः जांच के आदेश दिए और गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति जांच कर रही है। उन्होंने सभी पक्षों से निष्पक्ष जांच में सहयोग करने की अपील की।

वहीं, पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष एवं उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पलटवार करते हुए कहा कि बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में मंदिर समिति के वर्तमान अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक की भूमिका गंभीर सवाल खड़े करती है। उनका आरोप है कि देहरादून कार्यालय के लिए नियुक्त वैयक्तिक सहायक को बदरीनाथ ले जाकर चढ़ावे की गिनती के कार्य में लगाया गया, जिसकी जवाबदेही से वर्तमान अध्यक्ष बच नहीं सकते।

गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी को उनके आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए सार्वजनिक बहस की चुनौती देते हुए कहा कि वे मंगलवार 14 जुलाई दोपहर 12:30 बजे प्रेस क्लब में खुली चर्चा के लिए उपस्थित रहें। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और तथ्य जनता के सामने रखें ताकि सच सामने आ सके।

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