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उत्तराखंड में गुस्साए हाथी ने बरपाया कहर, मंदिर से लौट रहे युवक को कुचलकर मार डाला

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प्रकृति के साथ छेड़छाड़ और वन्य जीवन में इंसानी दखल के हमेशा बुरे अंजाम होते हैं। पहाड़ों में शहर जंगलों की सीमा तक फैल रहे हैं, जिस वजह से जंगली जानवरों के लिए रहने की जगह सीमित होती जा रही है। इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव हो रहा है। ताजा मामला खटीमा का है, जहां टस्कर हाथी ने एक ग्रामीण को कुचल कर मार डाला। हमले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लाश को अपने कब्जे में ले लिया। युवक की मौत के बाद उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शव को देख युवक की मां और चचेरी बहनें बेहोश हो गईं। लोगों ने उन्हें बड़ी मुश्किल से संभाला। घटना चकरपुर कस्बे की है, जहां 40 साल का चंचल सिंह मौनी वनखंडी महादेव शिव मंदिर में भंडारे में हिस्सा लेने गया था। रात नौ बजे वो मंदिर से वापस लौट रहा था, कि तभी टनकपुर हाईवे से 50 मीटर अंदर जंगल में टस्कर ने चंचल पर हमला कर दिया। हाथी ने चंचल के पेट और पैर को बुरी तरह कुचल दिया, जिस वजह से उसकी मौत हो गई। सुबह लोगों ने जंगल में उसकी लाश देखी तो उनके होश उड़ गए। वन विभाग और पुलिस को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद मृतक का भाई और परिजन मौके पर पहुंचे। युवक की लाश जिस वीभत्स हालत में मिली उसे देख युवक की मां और बहनें बेहोश हो गईं।

ग्रामीणों ने बताया कि चंचल पिछले कई साल से अपने घर से अलग रह रहा था, 8-9 साल पहले उसकी शादी हुई थी, लेकिन उसकी पत्नी अलग रहती है। कोई काम ना होने की वजह से वो घर पर कम ही आता था। ग्रामीणों ने बताया कि चकरपुर से सटे खटीमा रेंज के उत्तरी बनबसा कक्ष छह से आठ तक के जंगल में टस्कर की आवाजाही सप्ताह भर से हो रही है। पंथागोठ में हाथी ने एक छप्पर को तोड़ दिया है। लोग कई बार टस्कर को इलाके में घूमते देख चुके हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। साथ ही मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाने की तैयारी की जा रही है। हाथी के हमले में युवक की मौत की घटना से ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। वहीं वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है।