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उत्तराखण्ड़ विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उत्तराखण्ड में होगा लागू…

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बुधवार को उत्तराखण्ड़ विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल कानून के रूप में उत्तराखण्ड़ में लागू हो जाएगा। 6 फरवरी 2024 मंगलवार को यूसीसी विधेयक सदन के पटल पर रखा गया था, विधेयक पर दो दिन की लंबी चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों ने सरकार पर जमकर हल्ला बोला, यूसीसी विधेयक पर संशोधन और सिफारिशों की मांग करते हुए विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने की मांग की।

बुधवार को विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिहं धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए समाज के सभी वर्गों को साथ लेते हुए समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया है, देवभूमि के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है। उत्तराखण्ड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन एक भारत, श्रेष्ठ भारत का मजबूत आधार स्तम्भ बनेगा।

समान नागरिक संहिता के खास बिंदू-

सभी धर्म की लड़कियों के लिए विवाह की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष व लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है।

शादी के छह माह के भीतर अनिवार्य रूप से विवाह का पंजीकरण कराना होगा, पति जिस आधार पर तलाक ले सकता है, पत्नी भी उसी आधार पर तलाक की मांग कर सकती है।

पति या पत्नी के रहते दूसरी शादी यानि बहु विवाह पर सख्ती से रोक रहेगी, उत्तराधिकार में लड़के व लड़कियों को बराबर अधिकार मिलेगा।

लिन इन रिलेशन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा, विवाहित पुरूष या महिला लिव इन में नहीं रह पाएंगे।