
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में सीजेपी (CJP) के संसद मार्च में शामिल होने जा रहे एक राजनीतिक दल के नेता को हिरासत में लेने के मामले में राज्य पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यदि धारा 144 का उल्लंघन होना था, तो वह दिल्ली में होता। उत्तराखंड में आपके पास क्या अधिकार क्षेत्र था? यह गुंडागर्दी के अलावा कुछ नहीं है।
अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “आप इस देश में क्या कर रहे हैं? क्या आप सरकार की छवि बचाने के लिए हैं या लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए? पुलिस का यह आचरण पूरी तरह बेतुका है।
ये टिप्पणियां मंगलवार (21 जुलाई) को हुई सुनवाई के दौरान की गईं, जब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस से यह पूछा कि किस कानूनी अधिकार के तहत उन्होंने सोमवार को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (यूपीपी) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को उस समय हिरासत में लिया, जब वह सीजेपी के संसद मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और एक अन्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य पुलिस की कार्रवाई पर कई तीखी मौखिक टिप्पणियां कीं।



