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39 पदकों के साथ समाप्त हुआ भारत का यादगार कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 अभियान..

बॉक्सिंग बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत

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ग्लासगो/नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का रंगारंग समापन समारोह रविवार को संपन्न हुआ। भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया और अपने अभियान का शानदार अंत किया। समापन समारोह में हाल ही में बॉक्सिंग चैंपियन बनी जैस्मीन लैंबोरिया ने तिरंगा थामकर भारतीय दल की अगुवाई की।

समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा जब कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक ध्वज और बैटन भारत को सौंपा गया। इसके साथ ही वर्ष 2030 में गुजरात के अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की औपचारिक शुरुआत का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा। समापन समारोह में भारतीय संस्कृति, संगीत और विरासत की झलक ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने समापन समारोह के दौरान कहा कि भले ही समारोह ग्लासगो में हो रहा है, लेकिन पूरी दुनिया इस मंच के माध्यम से भारत की संस्कृति को देख रही है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद 2030 करोड़ों भारतीय युवाओं के लिए अवसरों का नया द्वार साबित होगा और भारत मेज़बानी के लिए पूरी तरह तैयार है।

बॉक्सिंग बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत

इस बार भारत के अभियान की सबसे बड़ी विशेषता बॉक्सिंग रही। भारतीय मुक्केबाज़ों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारतीय बॉक्सिंग का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है। बॉक्सिंग के अलावा वेटलिफ्टिंग, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।

मीराबाई चानू ने फिर बढ़ाया देश का मान

महिलाओं की 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने अपनी सफलता देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि यह पदक पूरे भारत का है। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी पदक जीतता है तो उसे अपने संघर्ष और मेहनत का पूरा सफर याद आता है।

वहीं महिलाओं की 69 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर ने कहा कि देश के लिए पदक जीतना गर्व की बात है। महिलाओं की 53 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि देशवासियों का प्यार और स्वागत उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

भिवानी में सीमा कालीरमण का भव्य स्वागत

महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली हरियाणा की सीमा कालीरमण का उनके गृह नगर भिवानी में भव्य स्वागत किया गया। सीमा ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर अधिक से अधिक युवा डिस्कस थ्रो में आगे आएं। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी के जीवन में संघर्ष और उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन मेहनत और परिवार के सहयोग से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने असाधारण कौशल, दृढ़ संकल्प और समर्पण का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश के खेल भविष्य को नई दिशा देंगी।

अहमदाबाद 2030 की ओर बढ़ते कदम

ग्लासगो में समापन के साथ ही अब भारत की निगाहें अहमदाबाद 2030 पर टिक गई हैं। समापन समारोह में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी. उषा और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ ध्वज और बैटन ग्रहण कर भारत की मेज़बानी का औपचारिक दायित्व स्वीकार किया। यह कॉमनवेल्थ खेलों का शताब्दी संस्करण होगा और भारत दूसरी बार इन खेलों की मेज़बानी करेगा।

ग्लासगो 2026 भारत के लिए केवल पदकों की सफलता की कहानी नहीं रहा, बल्कि यह नए खेलों में उभरती भारतीय ताकत, महिला खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी और भविष्य के खेल महाशक्ति बनने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हुआ। अब देश की उम्मीदें अहमदाबाद 2030 पर हैं, जहां भारत मेज़बान होने के साथ-साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान के लिए भी चुनौती पेश करने की तैयारी करेगा।

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