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डॉ. ध्यानी वाईस चांसलर ऑफ द ईयर – 2022 बैस्ट प्रैक्टिसिंग इन हिमालयन रीजन’ अवार्ड से सम्मानित….

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दिव्य हिमगिरी देहरादून द्वारा उत्तराखण्ड प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित ’5वीं अवार्ड सेरेमनी आन टीचर्स डे’ कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने डॉ. पी.पी. ध्यानी, कुलपति देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय को उनके द्वारा हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण एवं सम्बर्धन, विज्ञान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किये गये अद्धितीय, महत्वपूर्ण और अनुकरणीय योगदान के लिये ’वाईस चांसलर आफ द ईयर-2022 बैस्ट प्रैक्टिसिंग इन हिमालयन रीजन’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। डॉ. ध्यानी एक बेहद ईमानदार, सख्त, निर्भीक, कर्तव्यनिष्ठ और एक प्रख्यात वैज्ञानिक व शिक्षाविद है। जिनका पिछले 41 वर्षो का बहुत ही अच्छा ट्रैक रिकार्ड रहा है।

डॉ. ध्यानी द्वारा हिमालय क्षेत्र के सतत् विकास हेतु पिछले 41 वर्षो में कई महत्वपूर्ण, अद्धितीय और अनुकरणीय कार्य सम्पादित किये गये हैं, जिसे राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर समय समय पर सराहा गया है। केन्द्र सरकार की ओर से उन्होने विश्व के 20 देशों में हिमालय क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने भारतीय हिमालय क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण व सम्बर्धन एवं सतत् विकास हेतु कई महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेजों का निर्माण भी किया है।जिसमें गर्वनेन्स फार सस्टेंनिग हिमालयन इकोसिस्टम और नेशनल मिशन आन हिमालयन स्टडीज सम्मिलित हैं।

 

डॉ. ध्यानी ने केन्द्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में कॉप 22 – यू एन एफ सी सी सी, मोरक्को में और कॉप 13 – यू एन सी बी डी, मैक्सिकों में हिमालय पर साईड इवेन्ट्स का सफलतापूर्वक अयोजन भी किया था, जिनमें विश्व के कई देशों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया था।

 

डॉ. ध्यानी को भारतीय हिमालय क्षेत्र के 12 राज्यों के सांसदो को भारतीय हिमालय क्षेत्र के सतत् विकास पर चर्चा करने हेतु एक मंच पर लाने का श्रेय भी जाता है। उन्होंने 3 बार पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के तत्कालीन केन्द्रीय मंत्रियों की अध्यक्षता में हिमालय क्षेत्र के सांसदों की बैठकें आयोजित करवायी थी, जिनमें हिमालय क्षेत्र में वैज्ञानिक सम्मत विकास करने, हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस देने, हिमालयन पर्यावरण नीति बनाने, केन्द्र में हिमालयी राज्यों के लिये अलग से मंत्रालय बनाने आदि पर गहन विचार विमर्श हुआ था। लेकिन आज तक न ही हिमालयन नीति बन पायी और न ही केन्द्र में अलग से हिमालय पर्यावरण एवं विकास मंत्रालय की स्थापना हुई।

 

डॉ. ध्यानी का स्पष्ट मानना है कि भारतीय हिमालय क्षेत्र के सतत विकास हेतु ’हिमालय नीति’ बननी चाहिए और केन्द्र में एक नये ’हिमालय पर्यावरण एवं विकास मंत्रालय’ की स्थापना होनी चाहिए। यह सूच्य है कि डॉ. ध्यानी एक प्रख्यात अर्न्तराष्ट्रीय वैज्ञानिक हैं और एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी। उनके 305 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रकाशन अभी तक प्रकाशित हो चुके हैं, जिसमें 23 पुस्तकें और 5 नीतिगत दस्तावेज भी सम्मिलित हैं।

 

डॉ. ध्यानी को उत्तराखण्ड राज्य के 3 विश्वविद्यालयों में कुलपति के रूप में और केन्द्र सरकार के एक राष्ट्रीय संस्थान में निदेशक के रूप में कार्य करने का वृहद अनुभव है। पूर्व में कई राष्ट्रीय और अर्न्तराष्ट्रीय अर्वाडों से भी डॉ. ध्यानी सम्मानित हो चुके हैं, जिसमें टॉप 100 साईन्टिस्ट ऑफ द वर्ल्ड – 2009, लिडिंग साइटिस्ट ऑफ द वर्ल्ड – 2009, भारत ऐक्सिलेन्स अवार्ड-2010, अवार्ड आफ एैक्सिलेन्स – 2012, उत्तराखण्ड रत्न -2019, वाईस चान्सलर ऑफ द ईयर अवार्ड – 2019 आदि शामिल हैं।