
उत्तरकाशी जिले के धराली में आई भीषण आपदा को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी राहत एवं बचाव कार्य जारी है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान मलबे में दबे लोगों की तलाश में लगे हुए हैं, हालांकि खराब मौसम राहत कार्यों में बाधा बना हुआ है। प्रशासन के अनुसार, अब तक 42 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है, जिनमें से एक का शव बरामद किया जा चुका है।
सेक्टरवार बंटे राहत कार्य
आपदा प्रभावित क्षेत्र को सेक्टरों में बांटकर बचाव अभियान चलाया जा रहा है:-
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सेक्टर-ए: एनडीआरएफ
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सेक्टर-बी: भारतीय सेना
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सेक्टर-सी: एसडीआरएफ
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सेक्टर-डी: आईटीबीपी
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सड़क सेक्टर: लोनिवि, बीआरओ और बीजीबी रुड़की
इसके अलावा, एनडीआरएफ के नियंत्रण कक्ष के साथ एक इंसीडेंट कमांड पोस्ट स्थापित की गई है। अब तक प्रभावित क्षेत्र से लगभग 1300 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। प्रशासन का मानना है कि अधिकांश फंसे हुए लोगों को बचा लिया गया है।
भारी बारिश से बढ़ी चुनौतियाँ
मौसम विभाग ने उत्तराखंड में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है, जिसके कारण मंगलवार को भी बचाव अभियान देरी से शुरू हो पाया। इसके अलावा, खीर गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हर्षिल घाटी में लोगों में दहशत फैल गई है। कुछ ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है।
स्कूल बंद, राहत सामग्री का वितरण
बारिश के अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने देहरादून, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, नैनीताल, उधमसिंह नगर, बागेश्वर और चंपावत जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया है। साथ ही, प्रभावितों की मदद के लिए 635 सूखे राशन के पैकेट भेजे गए हैं।
आर्थिक नुकसान का आकलन
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस आपदा में 40 होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट को भारी नुकसान हुआ है, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को झटका लगा है। अधिकारियों का कहना है कि बचाव कार्य तेजी से जारी रहेगा, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अभियान में देरी हो सकती है।