उत्तराखंड- सावन माह के शुभारंभ के साथ ही उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ क्षेत्र भगवान शिव की भक्ति में सराबोर हो गए हैं। लाखों शिवभक्त और कांवड़ यात्री गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार पहुंच रहे हैं, जबकि विभिन्न शिव मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर जारी है। कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।
हरिद्वार के हर की पौड़ी घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कांवड़ यात्री पवित्र गंगा जल भरकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। एक श्रद्धालु ने कहा कि हरिद्वार आकर उन्हें बेहद अच्छा महसूस हो रहा है और प्रशासन द्वारा यात्रियों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई हैं।
वहीं ऋषिकेश में सावन के पहले दिन आधी रात से ही नीलकंठ महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्त भगवान शिव का जल, दूध, पुष्प, फल और मिष्ठान्न से अभिषेक कर रहे हैं। चंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी भवानी शंकर ने बताया कि सावन माह भगवान शिव की विशेष आराधना का समय है। उन्होंने कहा कि श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और नियमित पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं भोलेनाथ अवश्य पूर्ण करते हैं।
चंद्रेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे एक श्रद्धालु ने कहा कि सावन के महीने में यहां जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है और इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं।
11 अगस्त तक चलेगा कांवड़ मेला
हरिद्वार में विश्व प्रसिद्ध श्रावण कांवड़ मेला शुरू हो गया है, जो 11 अगस्त तक संचालित होगा। प्रशासन के सामने इस बार श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या को देखते हुए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती है। पिछले वर्ष कांवड़ यात्रा में करीब 4.52 करोड़ शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे थे, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या लगभग 4.12 करोड़ रही थी।
1200 सुरक्षाकर्मी संभालेंगे सुरक्षा व्यवस्था
नीलकंठ श्रावण कांवड़ मेले और यात्रा मार्गों की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। पूरे मेला क्षेत्र और यात्रा मार्ग की जिम्मेदारी लगभग 1200 पुलिसकर्मियों, पीएसी, होमगार्ड और पीआरडी जवानों को सौंपी गई है।
पुलिस के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी टीमें तैयार रहेंगी। इस बार सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाया गया है। पूरे क्षेत्र में 70 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जाएगी। आधुनिक नियंत्रण कक्ष से प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई होगी।
यात्रा मार्गों पर यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए मोबाइल पुलिस पार्टियां और इंटरसेप्टर वाहन लगातार गश्त करेंगे। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए पांच अस्थायी पुलिस चौकियां और आठ खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। पुलिस वेलफेयर टीम ड्यूटी पर तैनात जवानों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाकर उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य करेगी।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत यात्रा क्षेत्र को विभिन्न जोन और सेक्टरों में बांटा गया है। मेले में दो अपर पुलिस अधीक्षक, पांच क्षेत्राधिकारी, 16 निरीक्षक, 98 उपनिरीक्षक, महिला उपनिरीक्षक, 345 पुलिसकर्मी, 140 होमगार्ड और 135 पीआरडी जवान तैनात रहेंगे।
नोटों वाली कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र
हरिद्वार में इस बार एक विशेष कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दिल्ली के शिवभक्त दीपांशु अपने साथियों के साथ ऐसी कांवड़ लेकर पहुंचे हैं जिसे लगभग 38 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच यह अनोखी कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है।
कीर्तिनगर और देवप्रयाग में 11 दिन बंद रहेंगी मांस की दुकानें
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और यात्रा मार्गों की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कीर्तिनगर और देवप्रयाग क्षेत्र में 1 अगस्त से 11 अगस्त तक सभी मांस की दुकानें बंद रहेंगी।
यह निर्णय उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में यात्रा मार्गों पर साफ-सफाई, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समीक्षा भी की गई। संबंधित विभागों को यात्रा मार्गों पर स्वच्छता और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विभाग और स्थानीय प्रशासन को आदेशों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
हाईटेक निगरानी और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष फोकस
प्रशासन का कहना है कि इस बार कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए विशेष तैयारी की गई है। सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, यातायात और आपातकालीन सेवाओं को भी मजबूत किया गया है ताकि देशभर से आने वाले लाखों शिवभक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सावन के पावन महीने में उत्तराखंड के शिवधामों में उमड़ रही श्रद्धा और भक्ति एक बार फिर भगवान शिव के प्रति देशभर के श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बनकर सामने आई है। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा है।



