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जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी, सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन….

पेपर लीक पर पीएम मोदी के बयान से सियासत तेज

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नई दिल्ली- जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक उनका धरना जारी रहेगा। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत के बाद 26 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। दूसरी ओर, पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं।

CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन बाद अनशन समाप्त करने से उन्हें राहत मिली है क्योंकि उनकी ज़िंदगी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रस्तावित बैठक पर दिपके ने कहा कि बातचीत किसी न्यूट्रल स्थान पर होगी और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने बताया कि सरकार न्यूट्रल स्थान पर बातचीत के लिए सहमत हो गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी प्रमुख मांगों—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पीड़ित परिवारों को मुआवजा, निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने और प्रदर्शनकारियों पर कथित बर्बरता करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई—पर पहले दिन से कायम है।

इस बीच, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल उस दावे का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए खाना ले जा रहे युवकों को निज़ामुद्दीन थाने में हिरासत में लिया गया। डीसीपी साउथ ईस्ट दिल्ली ने इसे झूठा और भ्रामक बताते हुए कहा कि पुलिस केवल निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमित जांच और सत्यापन ड्यूटी कर रही थी।

उधर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था। वांगचुक के अनुसार, लंबी बातचीत और देश में संभावित तनाव की स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया। बाद में मेदांता अस्पताल में उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी भूख हड़ताल समाप्त की।

इधर, पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और कई आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 22 लाख विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष बचाना था, इसलिए कम से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई और 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट संबंधी प्रस्ताव तैयार हो चुका है, जिस पर कैबिनेट में चर्चा के बाद संसद के मौजूदा सत्र में जल्द से जल्द विधेयक लाने का प्रयास किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर कुछ कहना है तो उन्हें संसद में आकर बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधी रात को वीडियो संदेश जारी करने के बजाय प्रधानमंत्री सदन में आकर जवाब दें, तभी उनकी बात को गंभीरता से लिया जाएगा।

जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन, सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच प्रस्तावित वार्ता तथा पेपर लीक मामले पर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के कारण राजधानी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

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