उत्तराखंडखास ख़बरदेहरादून

धामी कैबिनेट ने आगामी कुंभ मेले से जुड़े कार्यों तथा छोटे ठेकेदारों के संबंध में लिए महत्वपूर्ण फैसले…

आगामी कुंभ मेले से जुड़े कामों में तेजी लाने के लिए भी धामी कैबिनेट ने लिया अहम फैसला

ख़बर को सुनें

गुरूवार को धामी मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने प्रदेश के छोटे ठेकेदारों को बड़ा अवसर देने की दिशा में अहम फैसला लिया है। अब डी-श्रेणी के ठेकेदारों को डेढ़ करोड़ तक के ठेके मिल सकेंगे। वित्त विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी देते हुए नियमों में संशोधन कर दिया है। अभी तक डी श्रेणी के ठेकेदार एक करोड़ तक के ठेके के लिए ही पात्र थे। इससे बड़े टेंडरों में वह भाग नहीं ले पाते थे, जिस कारण स्थानीय स्तर पर ठेके मिलने में दिक्कतें आ रही थीं। ठेकेदार संघ लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग उठा रहा था। अब कैबिनेट के फैसले के बाद डी श्रेणी के ठेकेदार डेढ़ करोड़ तक के टेंडरों में भाग ले सकेंगे। इस निर्णय से छोटे ठेकेदारों को बड़ी राहत मिल सकेगी। अब उनको बड़े काम पाने के लिए बड़े ठेकेदारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जबकि, पहले एक करोड़ से थोड़ा अधिक लागत के काम भी उनकी पहुंच से बाहर हो जाते थे, जिस वजह से उनको सबलेटिंग का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन, अब ठेके की सीमा बढ़ने से क्षेत्रीय विकास को भी रफ्तार मिल सकेगी।

उत्तराखंड के विभिन्न विभागों में मौजूदा समय में डी श्रेणी के करीब 15 हजार ठेकेदार पंजीकृत हैं। लोक निर्माण विभाग में सबसे अधिक करीब 7 हजार ठेकेदार इस श्रेणी में आते हैं। सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्रामीण निर्माण विभाग, पेयजल निगम, जल संस्थान और यूपीसीएल में भी बड़ी संख्या में डी श्रेणी के ठेकेदार हैं।

आगामी कुंभ मेले से जुड़े कामों में तेजी लाने के लिए भी धामी कैबिनेट ने अहम फैसला लिया है। अब कुंभ मेलाधिकारी को एक करोड़ तक के काम अपने स्तर पर मंजूर करने का अधिकार मिल गया है। यह व्यवस्था स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के काम पर लागू होगी। बता दें कि, अब तक कुंभ से जुड़े हुए सभी कामों की मंजूरी के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। लेकिन, लंबी और जटिल प्रक्रिया होने की वजह से विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो रही थी। इसे देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। पांच करोड़ रुपये तक के काम को गढ़वाल आयुक्त मंजूरी देंगे। पांच करोड़ से अधिक लागत वाले काम पर पूर्व की तरह ही शासन स्तर से ही मंजूरी लेनी पड़ेगी।

निजी सहायता प्राप्त कॉलेजों में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सशर्त मंजूरी दी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब 21 अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों में भी ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना’ लागू की जाएगी। ऐसे महाविद्यालयों में पूर्णकालिक प्राचार्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी।

Related Articles

Back to top button